एक धड़े का नेतृत्व इंटक अध्यक्ष ओमप्रकाश मिश्र के हाथ में, तो दूसरे गुट के साथ खड़े हैं जिला अध्यक्ष सुशील यादव
कई वरिष्ठ नेताओं ने जताई नाराजगी, कहा— बिना राय लिए हुआ जिला अध्यक्ष का मनोनयन
सीवान जिला कांग्रेस में अंतर्कलह अब सतह पर आ चुकी है। बुधवार को स्व राजीव गांधी जी की पुण्य तिथि के मौके पर पार्टी दो गुटों में साफ तौर पर बंटी हुई नजर आई। एक ओर इंटक के जिला अध्यक्ष ओमप्रकाश मिश्र के नेतृत्व में कई पुराने और वरिष्ठ नेता खड़े हैं, तो दूसरी ओर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील यादव की अगुवाई में दूसरा गुट सक्रिय है।
ओमप्रकाश मिश्र के साथ खड़े हैं कई वरिष्ठ नेता
पार्टी के पहले गुट का नेतृत्व कर रहे हैं इंटक अध्यक्ष ओमप्रकाश मिश्र, जिनके साथ हैं कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रमाकांत सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष विनय चंद्र श्रीवास्तव, अनुसूचित जाति/जनजाति प्रकोष्ठ के अध्यक्ष पंचदेव राम, और प्रदेश प्रतिनिधि उपेन्द्र पांडेय।
इन नेताओं का कहना है कि वे सुशील यादव को कांग्रेस का जिला अध्यक्ष मानने को तैयार नहीं हैं, क्योंकि यह फैसला पार्टी कार्यकर्ताओं की राय के बिना लिया गया।
सुशील यादव की नियुक्ति पर जताई नाराजगी
कई कांग्रेस नेताओं ने बताया कि सुशील यादव पहले सीपीएम (कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया – मार्क्सिस्ट) के कार्यकर्ता रह चुके हैं और अचानक कांग्रेस में आकर जिला अध्यक्ष बन जाना, कार्यकर्ताओं के मन में सवाल खड़े कर रहा है।
नेताओं का आरोप है कि सुशील यादव की नियुक्ति कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार के निर्देश पर और बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम द्वारा बिना स्थानीय कार्यकर्ताओं की सहमति के कर दी गई।
गुटबाजी से कमजोर हो रही है जिला कांग्रेस
पार्टी कार्यकर्ताओं का मानना है कि इस प्रकार का एकतरफा फैसला न केवल लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है, बल्कि इससे संगठन भी कमजोर हो रहा है। अब पार्टी के अंदर दो खेमे बनने से संगठनात्मक गतिविधियों में टकराव और भ्रम की स्थिति बन गई है।
वरिष्ठ नेताओं ने की हस्तक्षेप की मांग
ओमप्रकाश मिश्र के गुट से जुड़े नेताओं ने आलाकमान से अपील की है कि इस गुटबाजी को खत्म करने के लिए शीर्ष नेतृत्व को हस्तक्षेप करना चाहिए। उनका कहना है कि पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर नए चेहरों को पद देना पार्टी की नींव को कमजोर कर सकता है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज
सिवान कांग्रेस में बढ़ती खींचतान को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। जानकारों का मानना है कि अगर समय रहते आलाकमान ने स्थिति को नहीं संभाला, तो जिले में कांग्रेस को संगठनात्मक रूप से बड़ा नुकसान हो सकता है।