करेजी (सीवान)। गुठनी प्रखंड के करेजी गांव में चल रहे नौ दिवसीय श्रीलक्ष्मी नारायण महायज्ञ के समापन की पूर्व संध्या पर शनिवार रात पहली बार भव्य गंगा आरती का आयोजन हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर श्रद्धा और भक्ति का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसे उपस्थित श्रद्धालु लंबे समय तक याद रखेंगे।
आरती का नेतृत्व यज्ञाचार्य पंडित दिनेश पांडेय ने किया, जबकि काशी से आमंत्रित सप्तपंडितों की विशेष टीम ने वैदिक विधियों से आरती संपन्न कराई। पंचमंच पर सजे आरती स्थल को आकर्षक रूप से सजाया गया था और देवमूर्तियों से अलंकृत किया गया था। कार्यक्रम की शुरुआत श्रीहरि की आराधना और “गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो” जैसे भजनों से हुई।
आरती के दौरान शंखध्वनि, धूप-दीप प्रज्वलन, मयूर पंख से पूजन और वैदिक मंत्रोच्चारण ने वातावरण को पूर्णतः आध्यात्मिक बना दिया। समापन के समय शिव तांडव स्तोत्र के साथ पांच मिनट की विशेष आरती ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उपस्थित भक्त तालियों की गूंज के साथ भक्ति में झूमते नजर आए।
महायज्ञ समिति के अनुसार, यह करेजी गांव के इतिहास में पहला अवसर था जब इस प्रकार की दिव्य गंगा आरती आयोजित की गई। आयोजन की भव्यता और शुद्ध वैदिक पद्धति ने इसे क्षेत्र के अन्य यज्ञों से विशिष्ट बना दिया। आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस आयोजन को देखने पहुंचे।
यज्ञाचार्य पंडित दिनेश पांडेय ने कहा कि जो श्रद्धालु काशी या हरिद्वार जाकर गंगा आरती नहीं देख सके, उनके लिए यह एक दिव्य और दुर्लभ अनुभव था। आरती की पूर्णता, विधिपूर्वक मंत्रोच्चारण और भक्तिपूर्ण वातावरण ने सभी को भावविभोर कर दिया।