पूर्व विधायक व्यास देव प्रसाद पर आचार संहिता उल्लंघन का आरोप तय, कोर्ट में हुए हाजिर

पूर्व विधायक व्यास देव प्रसाद पर आचार संहिता उल्लंघन का आरोप तय, कोर्ट में हुए हाजिर

2020 में बिना अनुमति चुनाव प्रचार करने का आरोप, भादवि की तीन धाराओं में आरोप तय; खुद को बताया निर्दोष

सीवान | 2020 विधानसभा चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता उल्लंघन के मामले में पूर्व विधायक व्यास देव प्रसाद की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सोमवार को सीवान के अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम अरविंद कुमार सिंह की अदालत ने उनके खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। अदालत ने उन्हें भादवि की धारा 143, 188 और 171 (एफ) के तहत आरोपी माना है।

कोर्ट में हाजिर हुए पूर्व विधायक

सोमवार को मामले की सुनवाई के लिए नियत तिथि पर पूर्व विधायक व्यास देव प्रसाद अपने अधिवक्ता प्रमिल कुमार गोप के साथ कोर्ट में उपस्थित हुए। सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले का सारांश पढ़ा और आरोपों को स्पष्ट किया। इसके बाद अदालत ने तीन धाराओं के तहत आरोप तय किए। आरोप गठन से पहले पूर्व विधायक ने स्वयं को निर्दोष बताया और कहा कि उन्हें झूठा फंसाया गया है।

2020 में रोहरा गांव में किया था बिना अनुमति प्रचार

मामला 20 अक्टूबर 2020 का है, जब बड़हरिया थाना क्षेत्र के रोहरा गांव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे व्यास देव प्रसाद ने बिना अनुमति के प्रचार किया था। यह प्रचार आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन माना गया और तत्कालीन सांख्यिकी पदाधिकारी सह स्थानीय चुनाव प्रभारी संजय सिंह ने इस मामले में बरहरिया थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

बड़हरिया थाना में दर्ज है मामला

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह मामला बड़हरिया थाना कांड संख्या 324/20 के रूप में दर्ज किया गया था। इसमें आरोप लगाया गया था कि व्यास देव प्रसाद ने बिना सक्षम प्रशासनिक अनुमति के चुनावी सभा का आयोजन किया और लोगों को एकत्र कर नियमों की अवहेलना की।

किन धाराओं में आरोप तय

अदालत ने पूर्व विधायक पर भारतीय दंड संहिता की निम्नलिखित धाराओं के अंतर्गत आरोप तय किए हैं:

धारा 143 – गैरकानूनी जमावड़ा

धारा 188 – सरकारी आदेश की अवहेलना

धारा 171 (एफ) – चुनाव से संबंधित अनुचित प्रभाव या व्यक्ति को किसी कार्य के लिए प्रेरित करना

आगे की सुनवाई में पेश होंगे साक्ष्य

अब इस मामले में आगे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष द्वारा साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएंगे। वहीं, पूर्व विधायक के बचाव पक्ष की ओर से भी दलीलें दी जाएंगी। मामले की अगली सुनवाई की तिथि कोर्ट द्वारा जल्द ही निर्धारित की जाएगी। यह मामला सीवान जिले की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि इसमें एक पूर्व विधायक सीधे तौर पर अभियुक्त हैं।

Leave a Comment