निषेधाज्ञा के उल्लंघन और ध्वनि विस्तारक यंत्र के गलत इस्तेमाल का है मामला, बार-बार कोर्ट में गैरहाजिर रहने पर लिया गया सख्त फैसला
राजद सुप्रीमो और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। सीवान की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने शनिवार को उनके खिलाफ कुर्की की कार्रवाई का आदेश दे दिया है। यह आदेश लगभग 14 साल पुराने आचार संहिता उल्लंघन के मामले में पारित किया गया है, जिसमें लगातार अदालत की तारीखों पर अनुपस्थित रहने के कारण यह सख्त कदम उठाया गया है।
मामले की सुनवाई अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सह विशेष अदालत एमपी एमएलए अरविंद कुमार सिंह की अदालत में चल रही थी। अदालत ने पाया कि लालू प्रसाद यादव बार-बार समन और गैर जमानती वारंट के बावजूद हाजिर नहीं हो रहे हैं।
क्या है पूरा मामला ?
वर्ष 2000 में दारौंदा विधानसभा उपचुनाव के दौरान यह मामला सामने आया था। उस समय लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे और राजद उम्मीदवार परमेश्वर सिंह के समर्थन में चुनाव प्रचार करने सीवान पहुंचे थे। इस दौरान धारा 144 लागू होने के बावजूद उन्होंने बिना प्रशासन की अनुमति के ध्वनि विस्तारक यंत्र (लाउडस्पीकर) का इस्तेमाल कर जनसभा की। यह आदर्श आचार संहिता और निषेधाज्ञा का उल्लंघन था।
सूचना मिलने पर तत्कालीन अंचलाधिकारी और उड़न दस्ते के निरीक्षण प्रभारी शंकर महतो ने मौके पर जाकर जांच की और पाया कि आचार संहिता का उल्लंघन हुआ है। इसके बाद लालू प्रसाद यादव और परमेश्वर सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
परमेश्वर सिंह के निधन के बाद अकेले बचे अभियुक्त लालू
मामले के सह-अभियुक्त परमेश्वर सिंह की मृत्यु हो जाने के बाद मुकदमा अब सिर्फ लालू प्रसाद यादव के खिलाफ चल रहा है। अदालत ने पहले ही धारा 188 आईपीसी (सरकारी आदेश का उल्लंघन) के तहत संज्ञान लेते हुए उन्हें नोटिस भेजा था। बावजूद इसके, यादव की ओर से अदालत में कोई उपस्थिति नहीं हुई।
दो बार जारी हो चुका है गैर जमानती वारंट
इस मामले में कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव के खिलाफ पहले भी दो बार गैर जमानती वारंट जारी किया था। साथ ही, आदेशों का अनुपालन नहीं करने पर तत्कालीन थाना प्रभारी को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था।
शनिवार को मामले की पुनः सुनवाई निर्धारित थी, लेकिन लालू प्रसाद की ओर से फिर कोई उपस्थिति नहीं हुई। इस पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए उनकी संपत्ति कुर्क करने का आदेश पारित कर दिया।